जानिए, वन (forest in hindi) किसे कहते है

Van Sanrakshan Par Nibandh

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Van Sanrakshan Par Nibandh
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प्रस्तावना- वन प्रकृति के द्वारा दिया हुआ एक अमूल्य उपहार है। ये मनुष्य के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण और उपयोगी होते हैं। वन और मनुष्य परस्पर एक दूसरे के सहयोगी होते हैं।

प्राचीन काल से ही मनुष्य के जीवन का गहरा संबंध रहा है। ये मनुष्य के जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में लाभकारी होते हैं।

वन प्राकृतिक गुणों के भंडार होते हैं। वन पेड़ पौधों का एक समूह होता है। जिसे हम वन संपदा या ग्रामीण क्षेत्रों में जंगल कहते हैं। ये जंगली जीव जंतुओं के आश्रय स्थल होते हैं।

वनों से हमें खाना बनाने के लिए ईंधन, फर्नीचर बनाने के लिए लकड़ी और व्यवसायिक उद्योगों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है।

Van Sanrakshan Par Nibandh

वनों का मनुष्य के जीवन में बहुत अधिक महत्व होता है। वन प्राकृतिक ऊर्जा के स्रोत होते हैं। वन मनुष्यों के द्वारा छोड़ी गयी हानिकारक गैस कार्बन डाई ऑक्साइड(Co2) गैस का सेवन करते हैं और मनुष्य के जीवन लिए सबसे उपयोगी जीवनदायिनी ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

ऑक्सीजन मनुष्य के जीवन के लिए सबसे उपयोगी गैस है जिसके बिना जीवन की कल्पना असंभव है। वनों से हमें अनेक प्रकार की प्राण दायिनी औषधियां प्राप्त होती है।

वैदिक काल से मनुष्य जड़ी बूटियों के लिए पेड़ पौंधों और जंगली वनस्पतियों पर निर्भर है। वनों से हमें लकड़ियां, फल ,फूल, सब्जियां और पशुओं के लिए चारा प्राप्त होता है।

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वनों का देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। वनों से फर्नीचर व्यवसाय के लिए लकड़ियां प्राप्त होती है। औद्योगिक व्यवसायों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। रोगों के उपचार के लिए अनेक प्रकार की औषधियां प्राप्त होती हैं, पशुओं के लिए चारा प्राप्त होता है और फल, फूल, सब्जियां तथा अन्य कई तरह के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं।

इन सभी उत्पादों से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है। इनसे भारत में करोड़ों लोगों को रोजगार प्राप्त होते हैं। वनों का देश के आर्थिक विकास और सम्रद्धि में अतुल्य योगदान है। वनों से करोड़ों लोगों की आय के मुख्य साधन है।

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भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में कई पेड़ पौधों का धार्मिक महत्व है। भारत में तुलशी, पीपल, बरगद, आंवला, केला, आम आदि वृक्षों की विधिवत रूप से विधिवत रूप से पूजा की जाती है।

भारतीय हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे दो प्रकार के होते हैं राम तुलसी, श्याम तुलसी। भारत में प्रति वर्ष कार्तिक मास के महीने में तुलसी का विवाह विधिवत रूप से सम्पन्न कराया जाता है।

सभी प्रकार की वैवाहिक रश्में निभायीं जाती हैं। वृक्ष मनुष्य के जीवन में हर प्रकार से सहयोगी होते हैं। वृक्ष मनुष्य की धार्मिक, प्राकृतिक और आर्थिक रूप से मदद करते हैं।

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वृक्ष प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूप से मनुष्य के लिए लाभकारी होते हैं।

वनों से प्रत्यक्ष लाभ निम्नलिखित प्रकार के हैं।

  1. वनों से हमें लकड़ियां प्राप्त होती हैं जिनका प्रयोग हम ईंधन के रूप में करते हैं। वनों में भिन्न भिन्न प्रकार के वृक्षों से भिन्न भिन्न प्रकार की लकड़ियां प्राप्त होतीं हैं जो व्यवसायिक रूप से मनुष्य के काम में आती हैं।

लकड़ियों का सर्वाधिक प्रयोग मनुष्य के दैनिक जीवन में किया जाता है। लकड़ियों का प्रयोग घरों को बनाने, भोजन पकाने, दांतून करने, बेत बनाने, टोकरियाँ बनाने इत्यादि कामों में किया जाता है।

  1. वनों से हमें औद्योगिक व्यवसायों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। कच्चे माल के रूप में लकड़ियां, गोंद, छालें, बांस ,जड़ी बूटियां इत्यादि वस्तुएं प्राप्त होती हैं।जो औद्योगिक व्यवसायों के लिए अत्यधिक आवश्यक होतीं हैं।
  2. वनों से हमें विभिन्न प्रकार की औषधियां प्राप्त होतीं हैं। ये औषधियां हमें पेड़ पौधों की छालों, पत्तियों, फलों, फूलों से प्राप्त होती हैं। इन औषधियों का प्रयोग विभिन्न प्रकार के रोगों की रोकथाम के लिए किया जाता है।
  3. वनों की लकड़ियों का प्रयोग कई प्रकार के कुटीर और लघु उद्योगों में किया जाता है। इन उद्योगों से लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।
  4. भारत सरकार को वनों से करोड़ों रुपये राजस्व के रूप में प्राप्त होता है ।

6.वनों से पशुओं के लिए चारा प्राप्त होता है। सभी प्रकार के पशु पक्षियों को भोजन वनों से ही प्राप्त होता है।

  1. वन पशु पंक्षियों के आश्रय स्थल होते हैं। सभी प्रकार के वन्य प्राणियों का जीवन वनों पर निर्भर रहता है।

वनों से अप्रत्यक्ष लाभ अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक होते हैं।

1.पेड़ पौधे वातावरण के संतुलन को बनाये रखते हैं। सभी जीवधारी वातावरणीय ऑक्सीजन का प्रयोग करके Co2 मुक्त करते हैं। पेड़ पौधे Co2 का उपयोग प्रकाश संश्लेषण क्रिया में करके O2 मुक्त करते हैं। इस प्रकार से वायुमंडल में O2 तथा Co2 की मात्रा का संतुलन बना रहता है और वातावरण स्वच्छ बना रहता है।

  1. पेड़ पौधे मृदा अपरदन रोकने में सहायक होते हैं। पेड़ पौधे मृदा का आवरण बनाते हैं। इनकी जड़े मृदा कणों को बांधे रखती हैं। ह्यूमस मृदा की जल धारण क्षमता वायु संचार में वृद्धि करती है।इससे मृदा अपरदन को रोकने में सहायता मिलती है।

3.वन वातावरणीय तापक्रम नमी और वायु प्रवाह का नियंत्रण करके जलवायु में संतुलन बनाये रखते हैं।

4.वन और वर्षा एक दूसरे के सहायक होते हैं। वनों से वर्षा होती है और वर्षा से वनों में वृद्धि होती है। वह वर्षा में सहायक होते हैं।

  1. पेड़ पौधे भूमि के कटाव को रोकते हैं। पेड़ पौधे पहाड़ों को स्थिर बनाये रखते हैं। वृक्ष बाढ़ से होने वाले मिट्टी के कटाव को रोकते हैं।

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निष्कर्ष-:

पेड़ पौधे प्राचीन काल से ही मनुष्य के सहयोगी रहे हैं। प्राचीन समय में जब मानव सभ्यता का जन्म हुआ तब से ही मानव जंगलों में रहता आ रहा है।

वनों में रहना, फल ,फूल, पत्तियों का भोजन करना,पेड़ पौधों की छाल व पत्तों के वस्त्र पहनना, नदियों में पानी पीना आदि सभी कार्यों के लिए वनों पर ही निर्भर रहता था।

वन मनुष्य के लिए सभी प्रकार की स्थितियों में कल्याणकारी होते हैं। वन मनुष्य की बिना किसी स्वार्थ के आजीवन सेवा करते हैं। वनों से हमें शीतल छाया, फल, फूल, सब्जियां, औषधियां गौद इत्यादि वस्तुएं प्राप्त होती है।

वर्तमान समय में वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। जिससे मनुष्य को आंधी, तूफान, भूकंप, बाढ़, अत्यधिक वर्षा जैसी कई प्रकार की आपदाओं का सामना करना पड़ता है।

मनुष्य चंद रुपयों के लालच में आकर अपनी बहुमूल्य प्राकृतिक सम्पदाओं को नष्ट कर रहा है।

जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और वातावरण की शुद्धता कम हो रही है।

हमें अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए अपनी प्राकृतिक सम्पदाओं को सुरक्षित रखना होगा।

जब प्रकृति सुरक्षित होगी तो हमारा भविष्य सुरक्षित होगा।

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