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दीपावली पर निबंध हिंदी में। Essay On Dipawali in Hindi

दीपावली पर निबंध हिंदी में।
Essay On Dipawali in Hindi

प्रस्तावना- Introduction -:


मनुष्य के जीवन में त्योहारों का विशेष महत्व होता है। सम्पूर्ण विश्व में हर धर्म के लोगों के द्वारा भिन्न भिन्न स्थानों पर भिन्न भिन्न प्रकार के त्योहारों को मनाया जाता है। त्योहारों का मनाने का तरीका उनके धर्म और संस्कृति पर आधारित होता है। होली, दीपावली, रक्षाबंधन, दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्योहार है।

सम्पूर्ण भारत वर्ष में दीपावली के त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दीपावली को दीपोत्सव या दीपों का त्योहार कहा जाता है । दीपावली के इस पावन त्योहार को प्रकाश पर्व भी कहते हैं ।इस त्योहार को प्रति वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है । ये शरद ऋतु का महत्वपूर्ण त्योहार है।

इस त्योहार पर लोग अपने घरों, दफ्तरों, प्रतिष्ठानों आदि की पूजा अर्चना करके विद्युत लाइटों से सजाते हैं। एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार करते हैं । दीपावली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है इसको पांच दिनों तक मनाया जाता है । कई दिनों पहले से ही घरों की साफ सफाई और रंगाई पुताई की जाती है।

इस त्योहार पर लोग घरों के आस पास की साफ सफाई अच्छी प्रकार से करते हैं। ये पूर्णतः स्वच्छता का त्योहार है। दीपावली के त्योहार लोग पर नए कपड़े, वर्तन, वाहन वही आदि खरीदते हैं।

दीपावली का महत्व-Importance Of Deepawali-:


दीपावली के त्योहार का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। इस त्योहार का भारतीय संस्कृति में भी अधिक महत्व है। ये विभिन्न प्रकार की रीति रिवाजों और साफ सफाई के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस त्योहार की वजह से घरों मकानों, दुकानों और आस पास की सफाई भी अच्छी प्रकार से हो जाती है।इस त्योहार को शरद ऋतु के आरंभ में मनाया जाता है।

दीपावली पर गंदे वातावरण को साफ करने के लिए लोग अपने घरों के आस पास मोमबत्तियां और दीपक जलाते हैं ।दीपक से निकलने वाली लौ विषाक्त जीवाणुओं को नष्ट कर देती है। वातावरण की स्वच्छता के लिए भी इस त्योहार का विशेष महत्व है । दुकानदार अपनी दुकानों को विशेष रूप से सजाते हैं। मिठाई की दुकानों पर कई प्रकार की मिठाइयां तैयार की जाती हैं।

दीपावली का धार्मिक महत्व-
Religious Importance of Deepawali -:


दीपावली के त्योहार का भारतीय संस्कृति हिन्दू धर्म में अधिक महत्व है । भारतीय त्योहारों में धर्म के आधार पर कई प्रकार की प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं।

वास्तव में इस त्योहार के संबंध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है। जब अयोध्या के राजा भगवान श्री राम रावण को मारकर चौदह वर्ष का वनवास समाप्त करके वापिस अयोध्या लौटने की खुशी में अयोध्या वासियों ने सम्पूर्ण शहर में दीपक जलाकर खुशियां मनाई थीं। तब से ये दीपावली का त्योहार प्रति वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।


पांच दिवसीय दीपावली मनाने की विधि-
Method Of Celebrating Five Day Deepawali -:


दीपावली के इस प्रसिद्ध पवित्र त्योहार को पांच दिनों तक मनाया जाता है।


धनतेरस- Dhanteras -:


दीपावली का पहला दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को वैद्यराज धनवंतरी की पूजा की जाती है । वे अपने भक्तों को निरोगी रहने का आशीर्वाद देते हैं। इस दिन को लोग कुबेर भगवान की भी पूजा करते हैं। धनतेरस के दिन वर्तन, आभूषण और अन्य वस्तुओं को खरीदना बहुत ही शुभ मानते हैं।

नरक चतुर्दशी- Hell Chaturdashi-:


दीपावली के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी या छोटी दीपवली कहते हैं। इस दिन को लोग म्रत्यु के देवता यमराज की पूजा अर्चना करते हैं और घर के बाहर घी का दीपक जलाते हैं।


दीपावली- Deepawali-:


इस दिन को लोग भगवान श्री गणेश, लक्ष्मी मां, सरस्वती मां की भोग लगाकर पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन को मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर धन की वृद्धि करती हैं। इस दिन को बूढे ,बच्चे, और युवाओं में उत्साह होता है।


गोवर्धन पूजा- Goverment Worship -:


इस दिन को गोवर्धन की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जब इंद्रदेव क्रोधित होकर व्रज वासियों पर घनघोर वर्षा करने लगे थे तभी भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर व्रज वासियों की रक्षा की और इंद्र देव के अभिमान को चूर कर दिया। तभी से लोग गोवर्धन की पूजा अर्चना करते हैं। गौवंश की उन्नति के लिए उनकी सेवा की जाती है।


भाई दूज- Bhai dooj -:


अंतिम दिन को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन को बहिने भाई की आरती करती हैं और मांथे पर टीका लगाकर धीर्गायु की कामना करती है। बदले में भाई बहिन को वस्त्र , धन देकर उनका सम्मान करते हैं। ये भाई बहिन के प्रेम का प्रतीक होता है।

उपसंहार -Conclusion -:


दीपावली सुख समृद्धि और प्रकाश का पर्व है। इस पर्व को पूरे भारत वर्ष में पूरी श्रद्धा भाव से मनाते हैं। लोग अपने घरों, दफ्तरों, प्रतिस्थानों की अच्छी प्रकार से सजावट करते हैं।दीपावली पर लोग घरों को रंग बिरंगी लाइटों से सजाते हैं।
शाम के समय पर चारों तरफ जगमगाती हुई रोशनी में बच्चे और युवा पटाखे फोड़कर आनंदित होते हैं।

मित्रों, सगे संबंधियों को मिठाई बांटते हैं। इस त्योहार पर घर में माताएं बहिने भांति भांति के पकवान तैयार करती हैं। इस त्योहार पर बच्चे बहुत ही आनंदित होते हैं।
हमारे समाज की कुछ कुरीतियों के कारण दीपावली जैसे त्योहार को शर्मसार होना पड़ता है। इस त्योहार पर लोग जुआ खेलते हैं और शराब पीते हैं।

हमें पटाखों का प्रयोग कम करना चाहिए क्योंकि कहीं कहीं पर पटाखों से आग भी लग जाती है। इसके अधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है।

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