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कौवे पर निबंध हिंदी में। Essay On Crow In Hindi.

Essay On Crow In Hindi.

1.प्रस्तावना 2. शारीरिक रंग रूप 3. रहन-सहन 4 . कौवे का भोजन 5. कौवे का जीवनकाल 6. कौवे का धार्मिक महत्व 7. निष्कर्ष

Essay On Crow In Hindi

Essay On Crow In Hindi

प्रस्तावना-:
कौवा सभी जगहों पर पाये जाने वाला सामान्य सा पंछी है।कौवा काले रंग का पंछी है।यह कठोर और अप्रिय भाषा बोलने वाला पंछी है। यह सभी जगहों पर आसानी से दिख जाता है। कौवे अक्सर झुंड के रूप में दिखाई देते हैं। कौवे की विश्व भर में कई प्रजातियां पायी जाती हैं। कौवा सभी मौसमों में तेज गति से उड़ान भरने वाला पंछी है।

शारीरिक रंग रूप-:
कौवा काले रंग का मध्यम आकार का पंछी है।इसकी चोंच काफी कठोर और मजबूत होती है। कौवा कठोर से कठोर वस्तु को अपनी चोंच से फोड़ सकता है। कुछ कौवों का रंग हल्का सफेद और काला होता है।हल्के सफेद और काले रंग के कौवे आमतौर पर सभी जगहों पर आसानी से दिख जाते हैं।कौवे के पास दो मजबूत टाँगे और पैर होते है जिससे ये पेड़ की टहनी पर आसानी से मजबूत पकड़ बना लेता है । कौवे के शरीर का वजन लगभग 1 किलोग्राम तक हो सकता है। इसकी आंखे छोटी होती हैं लेकिन इनमें देखने की क्षमता सबसे अधिक होती है। इसका सम्पूर्ण शरीर पंखों से ढका हुआ होता है।

रहन-सहन -:
कौवे अपना घोंसला ऊंचे पेड़ों की टहनियों पर बनाते हैं। कौवे गांवों, शहरों,जंगलों आदि सभी जगहों पर पाये जाते हैं। कौवा खतरे को आसानी से समझने वाला पंछी है। जब किसी भी कौवे को कोई खतरा होता है तो वह अपनी कांव कांव की आवाज से अपने सहयोगी कोवौ को संकेत देता है। कांव कांव की आवाज सुनकर सभी कौवे एक जगह पर एकत्रित होकर अपने सहयोगी कौवे की मदद करते हैं। कौवा बहुत ही संवेदनशील पंछी होता है। कौवे के घोंसले के पास कोई भी जाता हुआ दिखाई देता है तो वह उस पर आक्रमण कर देता है। कौवे के पास सोचने समझने देखने की शक्ति सबसे अधिक होती है। वह अपने ऊपर आने वाले खतरे को आसानी से समझ लेता है।

कौवे का भोजन-:
कौवे का भोजन सड़े गले, पदार्थ ,मांस ,कीड़े मकोड़े आदि होता है।कौवा आमतौर पर मरे हुए जीव जंतु और सड़े गले पदार्थ खाना पसंद करता है।कौवा सर्वाहारी पंछी है। वह एक चालाक पंछी भी है जो अपना भोजन छोटे बच्चों से आसानी से छीनकर खा लेता है। कौवा सड़े गले पदार्थों एवं मृत जीव जंतुओं को खाकर वातावरण को सुद्ध बनाये रखता है।

कौवे का जीवनकाल-:
कौवे का औसतन जीवनकाल लगभग 14 वर्षों तक माना जाता है। मादा कौवा एक बार में लगभग 4 अंडे देती है। जिससे 25 दिन में बच्चे बाहर आ जाते हैं। कौवे अपने बच्चों की देखभाल ठीक प्रकार से करते हैं। कोयल कौवे को आसानी से मूर्ख बना देती है। नर और मादा कौवा दोनों ही अपने बच्चों को खाना खिलाते है। जब उनके बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वे उनको जमीन पर चलना , हवा में उड़ना भोजन करना सिखाते हैं। कौवा एक तेज बुद्धि का पंछी है। यह मनुष्य, पशु पंछियों एवं अन्य जीव जंतुओं की हरकतों को आसानी से समझ लेता है।

कौवे का धार्मिक महत्व-:
कौवे को शनिदेव भगवान की सवारी माना जाता है।इसका हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म में माना जाता है कि कौवे को खाना खिलाने से शनिदेव प्रसन्न हो जाते हैं। कौवे को कार्तिक मास के श्राद्ध पक्ष में खाना खिलाना बहुत ही शुभ कार्य माना जाता है।

निष्कर्ष-:
कौवा तेज बुद्धि और शातिर दिमाग वाला पंछी होता है। कौवा कांव कांव की आवाज करता है। यह अपनी कठोर और कर्कश वाणी के लिए जाना जाता है। यह झगड़ालू प्रवृती का पंछी होता है। ऐसा माना जाता है कि कौवा प्राकृतिक घटनाओं को आसानी से समझ लेता है और उनसे सतर्क रहने का संदेश देता है। कौवा सुबह के समय घर की छत पर बैठकर कांव कांव की आवाज करता है तो घर में अथिति के आगमन का संदेश देता है।

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