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होली पर निबंध हिंदी में। Essay On Holi in Hindi

होली पर निबंध हिंदी में।
Essay On Holi in Hindi

प्रस्तावना -Introduction -:


होली भारत वर्ष में मनाए जाने वाला मुख्य त्योहार है। इस त्योहार को हमारे देश में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत देश को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहां भिन्न भिन्न धर्मों के लोगों के द्वारा भिन्न भिन्न प्रकार के उत्सवों को मनाया जाता है।


हर एक त्योहार का एक धार्मिक महत्व होता है। उन धार्मिक महत्वों के आधार पर ही त्योहारों को मनाया जाता है। यहां सभी धर्मों के लोग आपस में मिलझुल कर आपसी भाईचारे और सदभावना के साथ सभी त्योहारों को एक साथ मानते हैं।

इसी प्रकार इस त्योहार को सम्पूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है। इस त्योहार पर रंगों का विशेष महत्व होता है। इसलिए इसे रंगों और खुशियों का त्योहार भी कहते हैं। इस त्योहार को लोग एक दूसरे को रंग लगाकर गले मिलकर सभी का सम्मान करते हैं।


यह त्योहार आपसी सदभावना और प्रेम का प्रतीक होता है। बच्चे होली के त्योहार का इंतजार बहुत ही बेसब्री से करते हैं। होली बच्चों का सबसे लोकप्रिय त्योहार होता है।


होली का महत्व- Importance of Holi-:


भारतीय संस्कृति में होली के त्योहार का विशेष महत्व होता है। होली एक मुख्य त्योहार है। इस त्योहार को भगवान श्रीकृष्ण की जन्म भूमि मथुरा में कई दिनों तक मनाया जाता है। होली को फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन जलाया जाता है।

होली को शहर गांव गली मोहल्ले के किसी सार्वजनिक स्थान पर जलाया जाता है। वहां पर उस क्षेत्र के सभी लोग एकत्रित होकर होली की पूजा करके होली को दहन करते हैं। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत माना जाता है।होलिका दहन के बाद दूसरे दिन को दुलहंडी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को सुभह से भी बूढे बच्चे औरते एक दूसरे को रंग लगाकर होली का आनंद लेते हैं। दोपहर के बाद होली के गीतों को गाया जाता है।

होली का धार्मिक महत्व- Religious Importance of Holi-:


होली के त्योहार का विशेष धार्मिक महत्व है। भारतीय संस्कृति और परंपराओं में होली एक बड़ा और मुख्य त्योहार है। इस त्योहार के संबंध में हिंदू धर्म के अनुसार एक कथा प्रचलित है।

प्राचीनकाल में हिरंडयकश्यप नाम का एक राजा था।वह राजा बहुत ही क्रूर, अन्यायी और घमंडी था। वह राक्षसी प्रवृत्ति का व्यक्ति था।वह अपने राज्य में स्वयं को भगवान मानता था। उस राजा का एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था । प्रहलाद बाल्यावस्था से धर्म और ज्ञान में रुचि रखता था। वह विष्णू के नाम का जाप करता था और उनको ही वह भगवान मानता था।

राजा हिरणाकश्यप अपने पुत्र की धार्मिक भावनाओं के कारण उससे ईर्ष्या करता था और उसे मारना चाहता था। उसको मारने के लिए उसने अपनी बहिन होलिका को चुना था। होलिका को भगवान शंकर से वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी।

इस प्रकार से होलिका ने फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन प्रहलाद को अपनी गोदी में लेकर अग्नि में बैठ गयी। होलिका जलकर राख हो गई और प्रहलाद जीवित रह गया। इसलिए इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।


निष्कर्ष- Conclusion -:


इस प्रकार से इस त्योहार को पूरे भारत वर्ष में बहुत ही उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार पर लोग अपने पुराने बैरभाव को भूलकर एक दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं। इस पावन त्योहार पर कुछ लोग अनैतिक कार्य करते हैं।जैसे शराब पीना, जुआ खेलना, मांस का सेवन करना आदि।
धार्मिक उत्सवों पर ये सब करना अनुचित और कानून के विरुद्ध होता है।

नोट- Note -:
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