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10 Lines On Mahatma Budhha in Hindi

10 Lines On Mahatma Budhha in Hindi

#1. गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के प्रवर्तक थे। आज बौद्ध धर्म के अनुनायी कई देशों में है।

#2. गौतम बुद्ध का जन्म ढ़ाई हजार ईसा पूर्व लुम्बिनी नेपाल में हुआ था।

#3. बुद्ध के जन्म के सात दिन पश्चात ही इनकी मां की म्रत्यु हो गई थी। इनका पालन पोषण मौसी गौतमी ने किया था।

#4. गौतम बुद्ध की माता का नाम मायादेवी तथा पिता का नाम शुद्धोधन था।

#5. बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। ये बचपन से ही करुण और दयालु स्वभाव के थे।

#6. महात्मा बुद्ध के जन्म के समय ही ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि ये बालक संसार को नया मार्ग दिखाने आया है।

#7. महात्मा बुद्ध का विवाह सौलह वर्ष की अल्पायु में यशोधरा नाम की राजकुमारी  के साथ हुआ था। उनका एक पुत्र  मात्र पुत्र राहुल था।

#8. सिद्धार्थ ने राजमहल को त्यागकर निरंजना नदी के तट पर वन में घौर तपस्या की और ज्ञान प्राप्त किया।

#9. महात्मा बुद्ध ने जिस वट वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था, उसे बौद्ध वृक्ष कहा जाता है।

#10. महात्मा बुद्ध ने सत्य, अहिंसा, करुणा, दया, परोपकार आदि मानवीय गुणों की शिक्षा दी थी।


बौद्ध धर्म का उदय करने वाले महात्मा बुद्ध का जन्म लगभग ढाई हजार ईसा पूर्व नेपाल देश के लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम शुद्धोधन तथा माता का नाम मायादेवी था।

ये महाराज शुद्धोधन के इकलौते पुत्र थे। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। महात्मा बुद्ध के जन्म के समय ही ज्योतिषियों ने यह भविष्यवाणी की थी कि ये बालक संसार को  नए पथ पर चलने के लिए अग्रसर करेगा।

10 Lines On Mahatma Budhha in Hindi

10 Lines On Mahatma Budhha in Hindi.

जन्म के सात दिन पश्चात ही इनकी माता का देहांत हो गया था। इनका पालन पोषण इनकी मौसी महारानी गौतमी ने किया था। ये बालक बचपन से ही  करुणा और दया के स्रोत थे।

सौलह वर्ष की अवस्था में ही इनका विवाह यशोधरा नाम की राजकुमारी के साथ हुआ था।  राजा शुद्धोधन ने उनके लिए सभी  ऋतुओं के लिए अलग अलग महल बनवाये थे।

ये महल सभी प्रकार की सुख सुविधाओं और भोगों से युक्त थे। इन्ही महलों में  राजकुमारी यशोधरा ने एक पुत्र को जन्म दिया। उसका नाम राहुल रखा था। राजकुमार बाहरी दुनिया से अनभिज्ञ थे।

10Lines On Mahatma Budhha in Hindi.

एक बार  राजकुमार सिद्धार्थ ने  नगर का भ्रमण किया तो उन्हें एक वृद्ध व्यक्ति दिखाई दिया। उसका शरीर कमजोर और झुका हुआ था।और वह लाठी के सहारे चल रहा था।

जब वह और आगे बड़े तो उन्हें एक बीमार व्यक्ती दिखाई दिया उसकी सांसे तेजी से चल रही थीं  उसका पूरा शरीर कमजोर पड़ गया था । वह दूसरे व्यक्ति के सहारे से बड़ी मुश्किल से चल पा रहा था।

थोड़ा ओर आगे बढ़ने पर उन्हें एक मृत व्यक्ति दिखाई दिया। जिसे चार व्यक्ति कंधे पर उठाकर श्मशान की तरफ़  ले जा रहे थे। कोई रो रहा था तथा कोई मन ही मन सिसक रहा था वाकी लोग उनके पीछे चल रहे थे।

इस प्रकार की मानवीय जीवन की घटनाओं को देखकर राजकुमार सिद्धार्थ का हृदय विचलित हो गया। एक दिन सिद्धार्थ ने अपनी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल समेत सम्पूर्ण राजपाट को त्यागकर सन्यासी हो गये।

उन्होंने निरंजना नदी के तट पर वन में  घौर तपस्या की और ज्ञान प्राप्त किया। सारनाथ में उन्होंने अपने संघ की स्थापना की और अपने पांच शिष्य बनाये। बाद में उन्हें धर्म के प्रचार प्रसार के लिए अलग अलग क्षेत्रों में भेज दिया।

सर्वप्रथम उनकी माँ गौतमी ने बुद्ध धर्म में प्रवेश किया। महात्मा बुद्ध ने पांच बातों पर विशेष बल दिया।

महात्मा बुद्ध की पांच महत्वपूर्ण बातें -:

#1. किसी भी जीव की हत्या मत करो।

#2. चोरी मत करो।

#3. झूंठ मत बोलो।

#4. नशा मत करो।

#5. दुराचार मत करो।

बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग गेरुए वस्त्र धारण करते हैं। महात्मा बुद्ध की मूर्तियों का अभिषेक किया जाता है। महात्मा बुद्ध ने जिस वट वृक्ष के नीचे बैठकर ज्ञान प्राप्त किया था।

उसे बौद्ध वृक्ष कहा जाता है। भगवान बुद्ध ने दया, करुणा, परोपकार, सत्य, अहिंसा आदि मानवीय गुणों की शिक्षा दी।

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