प्रदुषण पर निबंध Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi

Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi. paryavaran pradushan essay in Hindi 250 words. short essay on pollution in Hindi. pollution essay in Hindi. 10 lines. pollution essay in Hindi 10 lines. 10 lines on pollution in Hindi for class 2,3,4,5,6,7,8,9,10.

Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi

प्रस्तावना-:

प्रदूषण मनुष्य के जीवन के लिए एक विनाशकारी समस्या का रूप ले चुका है।पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसके अत्यधिक फैलाव के कारण मनुष्य के अंदर कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रहीं हैं।

ईश्वर ने हमें प्रकृति के रूप मे एक सुंदर वातावरण दिया है। मनुष्य अपने मन की जिज्ञासाओं और अभिलासाओं की पूर्ति के लिए दिन प्रतिदिन प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। हमें प्रकृति के द्वारा दिये हुए अमूल्य उपहार को सुरक्षित रखना होगा ।हमें अपने आस पास के प्रदूषण के फैलाव को रोकना होगा।

लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि भी प्रदूषण का मुख्य कारण है। मनुष्य औद्योगिकीकरण के जंजाल में फंसकर प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा है जिससे प्राकृतिक वातावरण में प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है। आज का मनुष्य नई नई तकनीक अपनाकर अपने निजी स्वार्थ के लिए प्रकृति को प्रभावित कर रहा है।

Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi


प्रदूषण की परिभाषा
-:

हमारे आस पास के वातावरण में उपस्थित वायु के कणों के रूप में दूषित तत्वों को प्रदूषण कहते हैं।इस पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित हानिकारक गैसों जैविक और अजैविक घटकों के कारण प्रदूषण दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है।इस प्रकार से जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ रहा है । हानिकारक गैसों के कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi


प्रदूषण के प्रकार:


इस प्राकृतिक भूमंडल पर कई प्रकार का प्रदूषण हो रहा है।इनमें से मुख्य प्रदूषण निम्नलिखित है।

1.जल प्रदूषण 2.वायु प्रदूषण 3.मृदा प्रदूषण 4.ध्वनि प्रदूषण 5. रेडियोधर्मी प्रदूषण 6. रासायनिक प्रदूषण 7. प्रकाश प्रदूषण

जल प्रदूषण-:

आज मनुष्य के जीवन के लिए जल प्रदूषण गंम्भीर समस्या बन चुका है। लगातार बढते हुए जल प्रदूषण के कारण पानी की गुणवत्ता का स्तर दिन प्रतिदिन खराब होता जा रहा है। मनुष्य अपने निजी स्वार्थ के लिए नदियों, तालाबों, झीलों, झरनों के जल को प्लास्टिक कचरा और अन्य अन्य अपशिष्ट पदार्थों को डालकर जल को प्रदूषित कर रहा है।

औद्योगिक व्यवसायों के केमिकल युक्त जल को नदियों तालाबों आदि में मिलाया जा रहा है। नदियों के किनारे बसे हुए शहरों के सीवेज के जल को नदियों में प्रवाहित किया जा रहा है। इस प्रकार से नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है। इस प्रदूषित जल के कारण जलीय जीव जंतु विलुप्त होते जा रहे हैं।

वायु प्रदूषण-:

प्राकृतिक वायुमंडल में धूल ,मिट्टी ,धुंआ,रसायन आदि का वायु में मिल जाना वायु प्रदूषण कहलाता है। वायु प्रदूषण से मनुष्य को कई प्रकार की गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। वायु प्रदूषण के कारण अम्लीय वर्षा का खतरा बढ़ जाता है।

औद्योगिक कारखानों , मोटर वाहनों आदि से निकले हुए काले धुंए से वायु प्रदूषण फैलता है। वायु प्रदूषण से मनुष्य को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है । वर्तमान समय में वायु प्रदूषण के कारण लोगों को घर से बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करना पड़ रहा है।

मृदा प्रदूषण -: (Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi)

मिट्टी में प्लास्टिक शहरों का कचरा और सीवेज का गंदा पानी मिल जाने से मृदा प्रदूषण फैलता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। मृदा प्रदूषण के कारण फसल की उपज पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। फसलों की उत्पादन क्षमता में कमी हो जाती है।

ध्वनि प्रदूषण-:


ध्वनि प्रदूषण मनुष्य के लिए गंभीर समस्या बन चुका है। वाहनों के सायरन, लाउडस्पीकरों, डीजे आदि की आवाज से जो शोर उत्पन्न होता है उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। ध्वनि प्रदूषण के कारण मनुष्य के अंदर बहरापन मानसिक तनाव जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इससे मनुष्य के सुनने की क्षमता में कमी होती है। इसके प्रभाव से मानसिक अवसाद जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

रेडियोधर्मी प्रदूषण-: (Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi)

परमाणु परीक्षणों, परमाणु विस्फोटों, एक्सरे मशीनों से निकले हुए प्रदूषण को रेडियोधर्मी प्रदूषण कहते हैं। रेडियोधर्मी प्रदूषण मानव जाति के लिए सबसे खतरनाक साबित हो सकता है।

रासायनिक प्रदूषण-:

रासायनिक क्रियाओं के द्वारा फैला हुआ प्रदूषण रासायनिक प्रदूषण कहलाता है। अधिक से अधिक रासायनिकों के प्रयोग के कारण जल प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है।

प्रकाश प्रदूषण-:

सादी समारोह, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में तीव्र प्रकाश वाली लाइटों से प्रकाश प्रदुषण फैलता है। प्रकाश प्रदूषण के कारण नेत्र रोगों की समस्याएं पैदा होतीं है।

प्रदुषण पर 10 वाक्य हिंदी में।
10 Lines On Pollution in Hindi

प्रदूषण सात प्रकार के होते हैं। जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण, रासायनिक प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण।

लगातार बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण मनुष्य को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

बढ़ते हुए प्रदूषण जैसी खतरनाक समस्या का जिम्मेदार स्वयं मनुष्य है। वह अपने निजी स्वार्थ के लिए कहीं न कहीं पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है।

मनुष्य अपनी निजी सुविधाओं की पूर्ति के लिए पेड़ पौधों जंगलों आदि की कटाई अंधाधुंध तरीके से कर रहा है जिससे पेड़ों और जंगलों संख्या में दिन प्रतिदिन कमी होती जा रही है। इन सभी कमियों के कारण वायु प्रदूषण फैल रहा है।

Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi

जनसंख्या वृद्धि भी प्रदूषण की समस्या के लिए जिम्मेदार है।

औद्योगिक व्यवसायों और शहरों से गंदे पानी को नालियों के द्वारा नदियों तालाबों आदि में छोड़ा जा रहा है। जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है।इस दूषित जल से जलीय जीव विलुप्त होते जा रहे हैं और पानी की गुणवत्ता में कमी होती जा रही हैं। इन सभी मानव बेवकूफियों के कारण जल संकट उत्पन्न हो रहा है।

मनुष्य अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए प्लास्टिक और प्लास्टिक से बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग सर्वाधिक मात्रा में कर रहा है। प्लास्टिक पोलीथीनों को हम कचरे के रूप में फेंक देते हैं जिससे मृदा प्रदूषण फैलता है। हमें खराब हुई प्लास्टिक को रीसाइकल के लिए इकट्ठा करना चाहिए।

आज सम्पूर्ण विश्व इस प्रदुषण की समस्या से जूझ रहा है।बढ़ते हुए प्रदुषण के कारण जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ रहा है।

अगर समय रहते हुए प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मनुष्य प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हो जाएगा।

हमारे आस पास के वातावरण में हानिकारक तत्वों की उपस्थिति को प्रदूषण कहते हैं ।

Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi. paryavaran pradushan essay in Hindi 250 words. short essay on pollution in Hindi. pollution essay in Hindi. 10 lines. pollution essay in Hindi 10 lines. 10 lines on pollution in Hindi for class 2,3,4,5,6,7,8,9,10.

निष्कर्स-:
(Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi) प्रदूषण की समस्या कोई आम समस्या नहीं है। ये मानव जीवन के लिए एक अभिशाप है। प्रदूषण के कई रूप होते हैं और इसका हर रूप मानव जाति को प्रभावित करता है।प्रदूषण के लिए कोई ओर नहीं बल्कि स्वयं मनुष्य ही इसके लिए जिम्मेदार है। मनुष्य प्राकृतिक सुख सविधाओं को छोड़कर कृत्रिम सुविधाओं की ओर बढ़ता जा रहा है। मनुष्य अपने निजी स्वार्थ के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *